14 वी लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी को
ऐतिहासिक विजय मिली, जिसके बाद लोगो को लगा कि अब आर.एस.एस और भाजपा की नीतियों को
पंख लगेंगे | जिन मुद्दों को लेकर भाजपा ने विपक्ष में बैठकर विरोध करती थी, उन्ही
मुद्दों को शासन में आने के बाद न केवल लागू कर दिया हैं बल्कि अपने फैसलों पर पीठ
भी थपथपा रही हैं|
जो भाजपा हमेशा से कांग्रेस को उसकी पकिस्तान नीति कि आलोचना की,
जबकि संघ तो एक कदम आगे जाकर पकिस्तान को हमेशा भारत के लिए ख़तरा माना; उस
पाकिस्तान के प्रति मोदी की नरम नीति भाजपा के कथनी और करनी में भेद की झलक
दिखलाती हैं |
यही भाजपा थी, जो कभी धारा 370 का विरोध करती थी और मानती थी कि एक
देश में दो संविधान नहीं होना चाहिये | आज जबकि राज्य में जब भाजपा गठबंधन की सरकार
हैं, तो इस कानून को ठन्डे पानी में डाल दिया हैं | इसके अलावा विपक्ष
में बैठकर जिस मनेरेगा और एफ.डी.आई का पुरजोर विरोध किया था, आज इसी का पुरजोर
समर्थन करते हैं बल्कि इसपर अपनी पीठ भी थपथपाती है | इसे सत्ता में
बैठने कि मजबूरी समझा जाये या फिर भाजपा ने अपने सिधान्तो से समझौता कर लिया हैं |
जिस आरक्षण के हालिया स्वरुप की संघ ने आलोचना की और नए सिरे से आरक्षण के समीक्षा की वकालत करती रही हैं, उसी भाजपा शासित हरियाणा सरकार ने जाटो को न सिर्फ आरक्षण दे डाली हैं बल्कि और दूसरे राज्यों में भी आरक्षण कि सुगबुगाहट तेज कर दी हैं, जिसमे गुजरात के पटेल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों का आरक्षण आन्दोलन प्रमुख हैं |
जिस महंगाई और काले धन के मुद्दे को लेकर भाजपा ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था आज सत्ता में आने के दो साल बाद भी देश में न तो कोई काला धन देश में वापस आया और न ही महंगाई पर कोई लगाम लगाईं | आज जबकि पूरे विश्व में पेट्रोल कि कीमत अपने न्यूनतम स्तर पर हैं, तब भी हमारे देश में पेट्रोल कि कीमत आसमान छू रही हैं | दाल गरीबो के थाली से दूर जा रही हैं, तो वही दूसरे आम जीवन कि चीजे भी आम लोगो कि पहुँच से दूर जा रहे हैं |
ऐसे में मोदी सरकार और कांग्रेस सरकार में क्या अंतर हैं, जिसपर भरोसा कर के जनता भाजपा को 2017 के चुनाव में यू. पी, उत्तराखंड और पंजाब की सत्ता पर भाजपा को काबिज करेगी | अब न तो भाजपा के पास कोई करिश्माई नेता हैं, और न ही कोई अच्छे जुमले, जिसको सुनकर लोग भाजपा पर फिर से भरोसा करेंगे |
सत्ता की कुर्सी ऐसी ही होती है,पक्ष-विपक्ष कोई भी हो सत्ता में आते ही फर्क आ ही जाता है | भाजपा अपनी अधिकतम योजनाओं को इम्प्लीमेंट करने का 2019-2022 तक का समय निश्चित कर चुकी है| शायद अगले चुनाव में अपने पांच साल और बढाने का काम कर रही है|
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