Wednesday, 7 December 2016

सपा- कांग्रेस गठबंधन से होगा यू.पी चुनाव में बड़ा उलटफेर


उत्तर प्रदेश में आगामी समय में चुनाव है और नेताओ का दल बदलने का क्रम भी शुरू है | ऐसे में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संभावित गठबंधन की खबरों ने विरोधियो की नींदे जरुर उडा दी है | सपा जिसके पास अखिलेश यादव जैसा बेदाग़ चेहरा है और इसके साथ ही पिछले 5 साल में सूबे में किया गया विकास का काम है | वही मुलायम सिंह यादव जैसा राजनीती का प्रकांड विद्वान है, जिसकी जमीनी पकड़ से कोई भी राजनितिक विश्लेषक गुरेज नहीं कर सकता है | हाल फिलहाल में जिस तरह से सपा परिवार में कलह की खबरे आई है, उसके बाद से अखिलेश यादव का मजबूत होना सपा के लिए संजीवनी का काम कर सकता है | क्योकी सपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व कबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की छवि एक भ्रष्ट नेता की है | लेकिन ये भी उतना ही सच है की शिवपाल यादव की जमीनी पकड़ काफी मजबूत है | मिला जुलाकर समाजवादी पार्टी अब तक मजबूत स्थिति में है, लेकिन जिस तरह से बसपा समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोट मुसलमानों पर सेंध लगाने का प्रयास कर रही है ऐसे में सपा का परेशान होना लाजिमी है | विपक्ष बार बार सूबे की कानून व्यवस्था पर सरकार को घेर रही है तो दूसरी तरफ समाजवाद पर परिवारवाद हावी होने का भी आरोप लगाती रहती है | जिसकारण सपा का जनाधार बहुत कमजोर हुआ है| सूबे के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में सपा के जनाधार में भरी गिरावट देखने को मिल रही है |
     

   वही कांग्रेस की बात करे तो सूबे में उसकी स्थिति बहुत ही खस्ताहाल है| 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से जिस तरह से पुरे देश में जो कांग्रेस विरोधी हवा चली है, उसको रोकना उनके लिए नितान्त आवश्यक है | जिसके लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है, लेकिन उसका कोई बड़ा लाभ मिलता नहीं दिख रहा है | लेकिन ये भी उतना ही सत्य है की सूबे में राहुल की किसान यात्रा से किसानो में एक आशा जरुर बढ़ी है, क्योंकि कांग्रेस जनित मानरेगा और किसानो के कर्ज माफ़ी योजनाओ ने किसान वर्ग का बहुत भला किया था | लेकिन फिर भी कांग्रेस को अभी सूबे में अपनी जमीं तलाशने के लिए और जद्दोजहद करने की जरुरत है | ऐसे में दोनों का आपस में गठबंधन सूबे के राजनीति के लिए जरुरी हो गया है |
     

      वही दुसरे तरफ सूबे में बीजेपी के पास कोई चेहरा नहीं है, जिसे वो अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर सके | वो अभी भी मोदी के चेहरे के ही सहारे है | जिसका परिणाम ये हो रहा है की नरेन्द्र मोदी ना तो प्रधानमन्त्री का काम ईमानदारी से कर पा रहे है और न संघटन का | बीजेपी अभी भी मोदी मैजिक का इंतज़ार कर रही है लेकिन नोटबंदी के बाद उसका भी कोई आसार नहीं दिख रहा है | इसलिए बीजेपी एक बार फिर राममंदिर और हिन्दुत्व का मुद्दा मुखर करने का प्रयास कर रही है | इसका कारण ये भी है की अपने ढाई साल के कार्यकाल में बीजेपी ने अपने एक भी वादे को पूरा नहीं किया है | महंगाई जस की तस है, काला धन विदेशो से अब तक नहीं आ सका है और देश के सैनिक अब भी सरहदों पर मर रहे है | जबकि जनता का ध्यान इन मुद्दों पर ना जाये इसलिए प्रायोजित खबरे चलाई जाती है जैसे- लव जिहाद, गौ मांस, सहिष्णुता का मुद्दा तो कभी जे.एन.यू का मुद्दा | इन सबमे उलझ कर न जनता इनसे सवाल कर पा रही है और ना ये जवाब देने को बाध्य है |
    

       अब बारी आती है बसपा की जो सिर्फ एक चेहरे के ही इर्द गिर्द घुमती है जिसका नाम है मायावती | हाल फिलहाल में इनके कई बड़े नेता इनका साथ छोड़कर दुसरे दलों में चले गए और आरोप भी लगा है की वो टिकट वितरण में पैसो का लेन देन करती है | लेकिन फिर भी इनकी ताकत को कम आकना विपक्षियो को भरी पद सकता है | इनके पिछले कार्यकाल में इन्होने कई हिटलर शाही काम किये थे जिसका परिणाम था की इन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा |  लेकिन फिर भी इन्होने सूबे की कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखा और कई माफियाओं को जेल में डाल दिया | भले ही ये काम उन्होंने बदले में किया हो, पर इसका लाभ जनता की जरुर मिला था |लेकिन इनकी दिक्कत भी ये है की इनके मुस्लिम प्रेम ने ब्राहमण समाज को इनसे दूर कर दिया है जिसके जुगलबंदी से इन्होने 2007 में सरकार बनायी थी |

     
        
      ऐसे में कांग्रेस सपा का गठजोड़ सूबे की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है | अखिलेश की तमाम किसानो के हित की योजनाओं ने उन्हें इस वर्ग में काफी लोकप्रिय बना दिया है तो वहो दुसरे तरफ से कांग्रेस के जुड़ने से मुसलमानो में भी एक विश्वास पैदा होगा | सूबे के उन क्षेत्रो में जहा वो अभी पीछे चल रही है वह उसे थोडा संजीवनी भी मिल जायेगी इसके साथ ही राहुल और अखिलेश दो युवा चेहरे है जिनके मिलने से युवाओं की भारी संख्या में जुड़ने की आशा की जा सकती है इसके अलावा डिम्पल और प्रियंका गाँधी की जुगलबंदी मायावती के प्रभाव को कम करने में काफी सहायक सिद्ध हो सकती है | सूबे में किसकी सरकार बनेगी ये तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन जिसकी भी बने सूबे में विकास ही उसका एजेंडा हो न की धार्मिक उन्माद और संकीर्णता |       

No comments:

Post a Comment