Thursday, 7 April 2016

साईं बाबा पर इतनी हाय तौबा क्यों ???

 साईं बाबा को भी हमारे देश में भगवान कि तरह पूजा जाता हैं. महाराष्ट्र में इनकी सबसे ज्यादा पूजा होती हैं जो अब धीरे- धीरे पूरे देश में शुरू हो गई हैं. एक आकड़ो को माना जाये तो आज साईं भगवान् के नाम पर बनाया गया साईं ट्रस्ट भारत कि सबसे रईस ट्रस्ट हैं और साईं बाबा जो आजीवन एक फकीर के तरह जीवन बिताये थे आज वो देश के सबसे अमीर भगवान बन चुके हैं. यही कारण हैं कि हमारे देश के बड़े धर्मगुरुओं की  चिंताये बढ़ गयी है. जहाँ एक तरफ उनकी दुकाने बंद हो रही हैं तो वही उनके चढ़ावे में आने वाली धनराशि की भी कमी हो रही है.


   यही कारण हैं कि विगत कुछ समय से द्वारिका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती साईं बाबा के पीछे हाथ धो कर पड गए हैं. कभी उन्हें भगवान् मानने से इन्कार कर देते हैं तो कभी धर्मसंसद में उनके प्रतिनिधि को बेज्जत किया जाता हैं. माना कि साईं भगवान् के नाम पर उनके भक्त अकूत सम्पति कमा रहे हैं. लेकिन इससे किसी धर्माचार्य को क्या आपत्ति ? यही खेल तो सभी मंदिरों में चल रहा हैं. हमारे देश में सबको अपना भगवान् चुनने का अधिकार है. अब तो स्वरूपानंद ने एक कदम और आगे बढकर बढकर ये कह दिया हैं कि मराठवाडा और विदर्भ में होने वाले सूखे और जलसंकट के लिये साई कि पूजा ही जिम्मेदार हैं.

 जहाँ एक तरफ पूरा महाराष्ट्र जल कि एक एक बूंद के लिए तरस रहा हैं ऐसे में स्वरूपानंद का ये बयान काफी दुखद हैं. आज जब समाज में आमुलचूल  सुधार कि जरुरत हैं, ऐसे में धर्माचार्य को सामाजिक आन्दोलन करना चाहिये. उसके बदले वो व्यर्थ के चोचले बाजी में उलझे हुए हैं. ये हमारे देश का दुर्भाग्य हैं कि हमारे धर्म का ध्वज ऐसे महापुरुषो के हाथ में हैं. इनकी सोच के स्तर का आकलन इस बयान से भी लगाया जा सकता हैं कि शनि के पूजा के लिए औरतो ने 400 साल पुरानी परम्परा को तोडकर समानता कि नयी इबारत लिखी उनका होसला बढाने के बजाय ये कह दिया कि उनपर शनि कि नजर पड गयी हैं अब महिलाओं के साथ दुराचार और शारीरिक शोषण जैसी अमानवीय घटना ज्यादा होगी. ये कैसे धर्माचार्य हैं अब देश कि जनता को तय करना हैं. . 

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