अभी हाल ही में संपन्न बिहार चुनाव में मोदी के विजय रथ को रोकने वाली
महागठबंधन सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया हैं जिसकी धमक से पूरा बिहार गुलजार हो
उठा हैं | बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने चुनावी वादे को अमली जामा
पहनाते हुए पूरे बिहार में देशी और विदेशी शराब पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा दिया हैं | वह भी तब जबकि
बिहार सरकार इन शराबों से राजस्व के रूप में मोटी रकम वसूलती थी | जी हाँ शराब किसी
भी राज्य में राजस्व का एक बड़ा हिस्सा होती हैं इसी कारण कोई सरकार इसके पूर्ण
प्रतिबन्ध के सन्दर्भ में नहीं सोचती हैं | ऐसे में नीतीश कुमार के इस साहसिक फैसले कि
सराहना होनी चाहिये | वह भी तब जबकि बिहार एक बीमारू राज्यों कि श्रेणी में आता हैं | आयेदिन लोग देशी
शराब पीकर बीमार पड़ते थे अथवा मृत्यु को प्राप्त हो जाते थे | ऐसे में नीतीश
कुमार के इस फैसले से उन परिवारों को संतोष प्राप्त होगा जिनके परिवार को रोज शराब
थोडा थोडा करके पीता था |
नीतीश कुमार हमेशा
से ही अपने कड़े फैसलों के लिए जाने जाते हैं लेकिन महागठबंधन सरकार बनने के बाद ये
आशा की जा रही थी कि अब नीतीश कि धार कुंद हो जायेगी | नीतीश के इस फैसले
ने सबको गलत साबित कर दिया हैं | अब ये देखना और दिलचस्प होगा कि नीतीश सरकार
अपने इस फैसले को जमीनी स्तर पर कैसे लागू करवाती हैं क्योंकी किसी फैसले के
क्रियान्वयन का काम प्रशासन का होता हैं | नीतीश देश के उन चुनिंदों नेताओं में से एक हैं
जिनकी छवि विकास पुरुष के रूप में हैं | बिहार अभी भी बहुत पीछे हैं और ख़ास तौर पर
रोजगार के क्षेत्र में | क्योंकि आज भी लाखो बिहारी रोजगार कि तलाश में प्रतिदिन अपने घर को
छोडकर दूसरे राज्यों में जाते हैं | बिजली, शिक्षा, सड़के भी मौलिक जरूरते हैं लेकिन
इनका विकास धीरे-धीरे हो रहा हैं | भाजपा चुनाव के दौरान जिस जंगलराज का भय दिखाकर
चुनाव जितना कहते थे वो अभी तक उसकी कोई ख़ास झलक दिखी नहीं हैं ऐसे में हम यही
अपेक्षा करेंगे के बिहार के विकास कि जिस गति को नीतीश ने पिछले 10 वर्षो में तेज
की थी उसकी धार महागठबंधन सरकार में कुंद नहीं होगी | बिहार के पहचान आदि
काल से ही शिक्षा और सम्पन्नता का केंद्र रहा था और अब इसकी पुरानी गरिमा को वापस
दिलाने का काम नीतीश सरकार को करना हैं |
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