दोस्ती एक ऐसा रिस्ता है जो इंसान खुद चुनता है नहीं तो और रिश्ते तो गॉड गिफ्टेड होता है चाहे वो माँ बाप भाई बहन यहाँ तक की पति पत्नी तक का रिस्ता भी हम नहीं चुनते है लेकिन दोस्ती का रिस्ता इंसान खुद चुनता है इसलिए इसमें इंसान को ईमानदार रहना चाहिए। दोस्ती है क्या जो दूर रहकर पास हो,जो औरो से ख़ास हो , जिसका अंदाज सबसे निराला हो ,अपने तकदीर पर जिसे विस्वास हो। हमे अपने दोस्तों के साथ धोखा नहीं करना चाहिए क्योकि इससे मानवता पर से विस्वास उठ जायेगा।हमारा इतिहास ऐसे कई दोस्ती के किस्से से भरे पड़े हैं। दोस्ती इंसानो का इंसानो से ही नहीं जाती। इंसानो ने जानवरो से भी दोस्ती की थी जानवरो ने अपनी जान देकर अपने दोस्त बचाई थी। महाराणा प्रताप और दोस्ती पुरे भारत में प्रसिद्ध हैं। जीवन में अच्छे दोस्त मिलना उतना ही मुस्किल हैं जितना भगवान को खोजना । आज समाज में अवसरवादी मित्र ही मिलते हैं जो अच्छे समय में तो हमसफ़र की तरह मिलते हैं लेकिन जब समय विपरीत रहता हैं तो वो गधे के सींग जैसे गायब हो जाते हैं। सच्चे मित्र की पहचान विपत्ति ही होती हैं। उस समय जो मित्र परछाई के साथ दे वो ही सच्चा मित्र होता हैं सुख मैं तो सारी दुनिया ही मित्र जैसा व्यवहार करते हैं। जो आपसे दोस्ती बिना किसी स्वार्थ और लोलुपता के करे और दोस्ती पूरी ईमानदारी से निभाए वो सच्चे दोस्त होते हैं। दोस्ती में हम जितने ईमानदारी की अपेक्षा करते हैं उतनी ही ईमानदारी हमें भी अपने दोस्त के प्रति करनी चाहिए क्युकी जैसे हम अपने दोस्तों को सक की निगाहो से देखते हैं वैसे ही वो भी हमें सक की निगाहो से देख सकते हैं। जिस प्रकार दोस्ती हम चुनते हैं तो इसकी जिम्मेदारी भी हमारी ही होती हैं। कलयुग में दोस्त मिलना ही किसी वरदान से कम नहीं हैं । हमारे भारतवर्ष में तो कई दोस्ती के किस्से प्रसिद्ध हैं जिसे देखते हुए बॉलीवुड में कई फिल्मे दोस्ती पर बनी हैं ।
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