Saturday, 20 December 2014

पश्चिमी सभयता के प्रभाव


आज आधुनिक दौर मैं हम कही न कही अपने परिवार से दूर होते जा रहे हैं.पश्चिमी सभयता के प्रभाव के कारन हम सयुक्त परिवार से दूर भाग रहे है। कहते है की माँ बाप चार बच्चो को पाल सकते है लेकिन बच्चे
अपने एक माँ बाप को नहीं पाल सकते है। हम अपने संस्कृति से दूर भाग रहे है कुकी भारत ही वो एक मात्र ऐसा देश है जो सामूहिक परिवार मैं रहने की बात करता हैं। माँ बाप जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी और पूरी बचत बच्चो के भविस्य को बनाने मैं ख़र्च कर  दियाऔर हम उन्हें दो वक्त की रोटी और थोड़ा सा अपना प्यार
नहीं दे पा रहे है। माँ के  प्यार पर कब पत्नी का प्यार भरी पड़ने लगता हैं पता नहीं चलता है। माँ बाप पृथ्वी पैर ईश्वर का दूसरा रूप होता हैं और उनकी सेवा ही भगवान की सेवा हैं। हमे किसी तीर्थ स्थल पैर जाने की जरुरत नहीं हैं.। भारत जैसे देश में ओल्ड सेंटर का होना ही दुर्भाग्य की बात है। वृन्दावन मैं बुजुर्ग महिला की संख्या
देखकर मेरा सीना फट जाता हैं।
                                              मैं आज के युवाओ से अपील करना चाहता हूँ की वो अपने माता पिता की इज्जत करे उनका सामान करे। भगवान कही नहीं मिलेंगे सिर्फ उनके दिल से निकला आशीर्वाद ही हमारी सफलता की कुंजी होगी। वास्तव में जब किसी पेड़ की मजबूती उसके जड़ो की मजबूती से आकि जाती हैं वैसे ही दूसरे देश मैं हमें सम्मान तभी मिलेगा जब हम अपनी सभ्यता का सम्मान करेंगे। विवेकानंद ,अटल बिहारी वाजपेई ,नरेंद्र मोदी को सम्मान तब मिला जब उन्होंने अपने संस्कृति का सम्मान करते हुए अमेरिका में हिंदी में बात की थी। जब हम सभी पश्चिमी हवा में बहेंगे तो भीड़ में खो जायेंगे न हमें घर मैं सम्मान मिलेगा न पश्चिमी देशो में।हमारा समाज जोड़ने में विश्वास करता हैं और पश्चिमी सभ्यता तोड़ने में जिसका परिणाम है की भारत में एकल परिवारो की संख्या बढ़ रही हैं। 

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