Saturday, 20 December 2014

पाकिस्तान और आतंकवाद

आज सभी देश आतंकवाद की समस्या से परेसान हैं। पेशावर की घटना ने तो सभी देशो को स्तभत कर दिया हैं। सभी राष्ट्र इसको खत्म करना चाहते हैं लेकिन अपनी तुस्टीकरण की नीति के कारन इसके निवारण के लिए कुछ नहीं करना चाहते। पाकिस्तान ने पेशावर की घटना के बाद आतंकवाद के खात्मे के लिए कटिबद्धता जाहिर की लेकिन अगले दिन हाफिज सईद के बयान और 26/11 के सबसे बड़े दोषी को छोड़कर अपने दोहरे चरित्र को पुरे देशो को दिखाया हैं। भारत से न जाने कौन सी दुश्मनी हैं पाकिस्तान को की उन्हें १३२ मासूम बच्चो की चीखे भी नहीं सुनाई देती है। मानवता को सर्मसार करने वाली घटना के बाद भी पाक सरकार नहीं जांघ रही है तो उससे आतंकवाद के खात्मे की अपेक्षा करना ही मूर्खता है। आतंकवाद को कोई धर्म से जोड़ना गलत होगा क्योकि वो मानवता के दुश्मन है जिनका कोई धर्म नही हैं क्योकि बच्चो की हत्या करने वाला इंसान तो नहीं हो सकता और जानवरो का कोई धर्म नहीं होता हैं।
                                                                      मैं अपने देश के सभी नागरिको से अपील करना चाहता हूँ की ये देश हम सभी का हैं और इसकी रक्षा  हमे करनी होगी और इसके लिए बन्दुक उठाने की जरूरत नहीं हैं बस देश को तोड़ने वालो की बातो मैं नहीं आना हैं।हमारे एकता और आपस का विस्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं और इसी के कारन हमने 1965 ,71, 99 ,48 की लड़ाई जीती थी और इसी से घबराया पाकिस्तान अब सीधी लड़ाई नहीं बल्कि हमें तोड़कर आतंकवाद के माध्यम से हमे हराना कहता हैं। अब हमें और सतर्क रहना हैं क्युकी हमारा दुश्मन अब आगें  से नहीं पीछे से वार करने वाला हैं। आतंकवाद और पाकिस्तान एक दूसरे के पूरक हैं जैसे हम संसार को कोयला लोहा निर्यात करते हैं और वो संसार को आतंकवाद दे रहे हैं.। 

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