समाज के पिछड़े वर्ग की दशा और दिशा को सुधारने के लिए कई स्तर पर कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन उसमें सफलता प्राप्त कर दूसरों के सामने उदाहरण पेश करना कम लोगों के खाते में आया होगा। उनमें से एक हैं समाजसेवक और आराध्य संस्था के संस्थापक उमेश राय।
उन्होंने अपने प्रयासों से न सिर्फ पिछड़ी और जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए, बल्कि सैकड़ों को इसका लाभ भी मिला। भलस्वा क्षेत्र में रहकर 16 वर्षों से विभिन्न गैरसरकारी संस्थाओं और संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रहे उमेश राय ने विभिन्न प्रकार के माध्यमों से जरूरतमंद लोगों की मदद की है और उन्हें रोजगार मुहैया कराने का कार्य किया है। वे दूसरों को लिए प्रेरणा श्रोत हैं।
संस्था के माध्यम से सामूहिक रूप से बेघर लोगों की मदद के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं। इसके तहत नाइट शेल्टर की व्यवस्था और गर्म कपड़े, कंबल और अन्य जन सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा संस्था के स्त्री सुविधा केंद्र में महिलाओं के लिए विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण व शिक्षा केंद्र में कार्य होते हैं जहां महिलाएं रोजगार प्रशिक्षण के साथ ही शिक्षा भी प्राप्त करती हैं। महिला पंचायत के माध्यम से समय-समय पर विभिन्न कालोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों में अभावग्रस्त महिलाओं को उनके अधिकार और नए अवसरों के बारे में जानकारी दी जाती है। उमेश राय ने सैकड़ों महिलाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार के अवसर तलाशने में मदद कर रहे हैं। जहां उन्हें कम्प्यूटर शिक्षा की आधुनिक शिक्षा के साथ साथ घरेलू स्तर पर उद्योगों की शुरुआत करने के लिए जरूरी जानकारी देने का कार्य करते हैं। इसके अलावा सौंदर्य प्रशिक्षण, सिलाई, कढ़ाई व आर्ट क्राफ्ट की ट्रेनिंग दी जाती है।
इससे उन्हें रोजगार शुरू करने का बेहतर मौका मिलता है। हर क्षेत्र में अब तक सैकड़ों लोगों को इसका लाभ मिला है। संस्था की मदद से सिलाई में जहां अबतक 509 जरूरतमंद महिलाओं ने रोजगार प्राप्त किया है वहीं कम्प्यूटर का प्रशिक्षण लेने वाले करीब 530 लोगों को रोजगार मिला।ऐसे ही छोटे छोटे कदम एक दिन बहुत बड़ी उपलब्धि बनती हैं। कैलाश सत्यार्थी को ही ले लीजिये बचपन बचाओ आंदोलन ने आज उन्हें नोबेल विजेता बना दिया। निश्चित रूप से उमेश राय के ये कार्य मानवता के लिए और समाज के ठेकेदारो के लिए अच्छा उदहारण हैं। आज समाज को उमेश राय जैसे लोगो की जरुरत हैं जो सिर्फ अपने बारे मैं न सोचकर पुरे समाज के बारे मैं सोचते हैं।
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