Tuesday, 23 December 2014

लोकतंत्र की जीत

 |आज भारतीय जनता पार्टी की जीत ने स्पस्ट कर दिया हैं की अब जनता वंसवाद की राजनीति से ऊब चुकी हैं। अब लोगो को जात  पात और धर्म  के नाम पर मुर्ख बनाकर वोट मांगना अन्य दलो के लिए मुस्किल हो रहा हैं। शिक्षा की जागरूकता ने और संचार के विकास ने पार्टी की  कथनी और करनी में  अंतर स्पस्ट कर दिया हैं। लोकतंत्र में संचार की महती भूमिका होती है इसलिए तो संचार को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहते हैं। लोकतंत्र की रक्षा के लिए संचार और न्यायपालिका की बड़ी भूमिका होती हैं। कांग्रेस,सपा ,राजद ,रालोद  जैसी पार्टी जो परिवार की पार्टी है जो एक जाती विषेस की राजनीती करती है उन्हें ये समझ जाना चाहिए की अब जनता विकास चाहती हैं और जो विकास करेगा वो सत्ता में रहेगा और जो इसके इतर काम करेगा उसकी राजनीति ख़त्म समझो। जनता लोगो को चुन केर भेजती है की सरकार हमारा विकास करेगी पर  ये लोग अपनी ही जेब  भरने लगते हैं। अब जनता जाग गयी है और राजनितिक  दलों को अपनी पालिसी बदलनी होगी नहीं तो वो दिन भी दूर नहीं की ये पार्टिया भी भारतीय राजनीती का इतिहास बन जाएँगी।  जब सत्ता में बैठे लोग अपना नैतिक व सैवेधानिंक दायित्व नही निभाते है तो आमजन अपना नैसर्गिक व मौलिक अधिकार पाने के लिय महाक्रान्ति के लिय तैयार हो उठता है|इसकी शुरुआत जनता ने अपने सबसे बड़े अधिकार मतदान का खूब प्रयोग किया हैं। जिसका परिणाम यह हुआ की झारखण्ड,महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावो में देखने को मिला हैं और उम्मीद करते हैं ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
                लोकतंत्र में परिवतन बहुत जरुरी होता है नहीं तो सत्ताधीन सरकार को निरंकुश होते समय नहीं लगता। कांग्रेस भी सायद इसी पूर्वाग्रह से ग्रसित थी की विगत 60 साल से सत्ता पर काबिज हूँ और कोई विकल्प नहीं हैं जनता के पास। अब सभी पार्टियो को वंसवाद और जाट पात की राजनीती से ऊपर उठकर राजनीति करनी होगी नहीं तो उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी। 

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