Wednesday, 16 March 2016

भारत माता की जय बोलने में इतनी दिक्कत क्यों ?


संघ प्रमुख मोहन भागवत के भारत माता कि जय के बयान के बाद से ही इसपर इतनी राजनीति क्यों? जबकि इससे पहले राष्ट्रगान के बाद भारत माता कि जय बोली जाती थी चाहे वो कॉलेज में हो रही हो अथवा कोई सामाजिक संघटन के कार्यालयों में | इसमें न हिन्दू को कोई आपत्ति होती थी न मुसलमानों को लेकिन हाल फिलहाल में जिस तरह से इस मुद्दे का राजनीतिकरण हो रहा हैं, उससे सिर्फ देश में टूट हो रही हैं | 

 हमारे देश के मुसलमानों की देशभक्ति पर कभी शक नहीं किया जा सकता हैं | लेकिन कुछ मुसलमान नेता व धर्मगुरु अपने निजी स्वार्थ के पूर्ति हेतु देश के मुसलमानों को बरगलाते हैं | अगर इसी देश में अफजल गुरु, दाउद इब्राहीम, मेनन बंधू जैसे गद्दार पैदा हुए थे, तो इसी देश में अब्दुल हमीद, अब्दुल कलाम, असफाक उल्ला खान जैसे सरीखे देश भक्त भी पैदा हुए | जिन्होंने देश के लिये जान दी | उनके लिए पहले अपना देश था फिर मजहब | क्या बिना देश के कोई मजहब का अस्तित्व हैं | दारुल उलूम ने अभी हाल ही में फतवा जारी किया हैं कि भारत माता कि जय नहीं बोलना हैं | आखिर ऐसा कौन सा मजहब हैं जो एहसान फरोशी सिखाता हैं | 

 हम अपने इस जीवन देने के लिए रोज अल्लाह कि इबादत करते हैं, जबकि जिस जमींन पर बैठकर हम अल्लाह कि इबादत करते हैं तो उसकी जय करने में गुरेज क्यों? इसी का उपजा अनाज खाते हैं, इसी पर बहता पानी पीते हैं इसी के धूल में खेलकर हम अपना बचपन बिताते हैं, तो फिर इसकी इबादत करने में कैसी आपति | अगर यहाँ मीरजाफर जैसे गद्दार मुसलमान पैदा हुए हैं तो जयचंद जैसे गद्दार हिन्दू भी, ऐसे में किसी भी हिन्दू नेता को मुसलमानों के देशभक्ति पर अंगुली उठाने का हक़ नहीं हैं | 

आज जब पूरे देश में आतंकवाद जैसी समस्या पूरे विश्व में काल बनकर बैठी हैं ऐसे में भारतवर्ष में भारत माता कि जय के नाम पर विवाद हास्यास्पद लगता है | कुछ मुसलमान नेता खुद को इन मुसलमानों का हिमायती बताते हैं लेकिन आजतक उन्होंने इस कौम के सरपरस्ती व विकास के लिए क्या किया हैं, इसके जवाब में वो सिर्फ मुस्कुरा सकते हैं फिर चाहे वो औवेशी बंधू हो अथवा आजम खान साहब | कैमरे के सामने आग उगलने से कौम का विकास नहीं होता जनाब | मत भूलिये इस देश कि करोडो जनता ने आपको कुछ बोलने लायक बनाया हैं उनके विकास के लिए काम करो न कि उन्हें तोड़ने के लिये, हमारे देश के मुसलमानों को पता हैं उन्हें किसकी जय बोलना हैं; जिसपर उपजी रोटी वो खाते हैं अथवा उसकी जिसके वादों की  गूंज वो 5 साल तक सुनते हैं |
                                            भारत माता की  जय !               
                                                                              
                                                                                            अभिजीत कुमार सिंह 
                                                                                     मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म
                        

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