Saturday, 26 March 2016

वंशवाद से लोकतंत्र के भविष्य को खतरा



भारत जो विश्व की सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जाना जाता हैं, उसमे एक बार फिर राजतंत्र ने सेंध लगा दी हैं | भारत की आजादी लम्बी लड़ाई के बाद मिली, जीत के बाद लगा कि अब देश में कोई राजा नहीं कोई प्रजा नहीं, अब सब राजा होंगे सब प्रजा होगे | लेकिन आजादी के कुछ ही दशको के बाद लगने लगा कि नहीं अब देश में दूसरे तरह का राजतंत्र होगा, जिसमे जनता जनार्दन तो होगी लेकिन उसके हाथ खुले नहीं होंगे | जी हाँ में बात कर रहा हूँ देश में वंशवादी राजनीति के उज्जवल भविष्य की | इस तरह कि राजनीति कि शुरुवात नेहरु जी ने की | जिसे आज मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, करूणानिधि, चौधरी चरण सिंह का परिवार, राम विलास पासवान जैसे सरीखे नेता अपनाये हुए हैं. ये तो बस कुछ नाम हैं, जिनकी एक लम्बी कतार हैं |

                   
क्या हम ऐसा मान ले कि हमारे देश में नेताओं कि कमी हैं, जो देश कि सत्ता सिर्फ कुछ परिवारों के हाथ में होनी चाहिये | क्या कांग्रेस में प्रधानमन्त्री बनने कि योग्यता सिर्फ गाँधी परिवार को ही हैं ? क्या कांग्रेस पार्टी गाँधी परिवार कि खेती हैं, जिसपर सिर्फ नेहरु परिवार ही फसल काटेगा | कुछ ऐसा ही हाल हमारे मुलायम सिंह यादव का भी हैं जो खुद को नेताजी तो कहलाना पसंद करते हैं, लेकिन सूबे का मुखिया चुनने कि बात आई तो अपने बाद अपने बेटे को ही सूबे का मुखिया बना डाला | 


              निःसंदेह हर पिता अपने बेटे के लिए बेहतर भविष्य की कामना करता हैं, और उसके लिए प्रयास भी करता हैं लेकिन ये कैसा पुत्र मोह हैं कि इसके लिए देश के शासन कि बागडोर ही उसे तोहफे में दे दें | जनाब ये लोकतंत्र हैं ना कि राजतंत्र जिसे आप सिंहासन समझकर अपनों बेटो का राज्याभिषेक कर रहे हैं | ये हमारे देश के सवा सौ करोड़ आबादी वाली जनता के साथ धोखा हैं | आज देश की जो भी हालत हैं उसमे कही न कही इस वंशवादी राजनीति कि भी अपनी महती भूमिका हैं | आज जरुरत हैं देश को इस वंशवादी राजनीति के मिथक को तोड़ने कि जिससे कि देश को उस जगह पर ले जाया जा सके जहाँ गाँधी, बोस और अम्बेडकर साहब ले जाना कहते थे |       

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