इसके लिए वो खबरों को हल्का करने से भी गुरेज नहीं करते हैं | आज ऐसा कोई भी चैनल नहीं हैं जिसमे उद्यमियो का पैसा नहीं लगा हैं | जो अपना हित साधने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से किसी राजनीतिक दल के भोपू के रूप में कार्य करते हैं | उनमें खबरों के अपेक्षा विज्ञापनों की अधिकता दिखती हैं | जब हम इनके कारणों की गहराई में जाते हैं तो उसमे पूंजीवाद और राजनितिक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखलाई पड़ती हैं | इंडिया टी.वी, इंडिया न्यूज़, आई.बी.एन 7, जी न्यूज़, सी.एन.एन जैसे तमाम चैनल आज सत्ताधारी दल के मुखपत्रो के रूप में कार्य कर रही हैं | ये चैनल जनता में सरकार की सकारात्मक छवि बनाने का काम कर रही हैं जिसके बदले में सरकार से वो तमाम रियायते लेती हैं |
आज मीडिया किसी को भी जीरो से हीरो और हीरो से जीरो बनाने माद्दा रखती हैं | अरविन्द केजरीवाल के साथ मीडिया क्या जुडी उसे दिल्ली का मुख्यमंत्री ही बनाकर छोड़ी तो कभी कन्हैया कुमार जैसे छात्रनेता को भी देश का नेता बना देती हैं | आज देश में ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिसपर मीडिया की नजर नहीं जाती लेकिन कौन सा नेता क्या खा रहा हैं कौन हीरो किसके साथ डेट कर रहा हैं ऐसे तमाम खबरों से पूरा मीडिया भरा पड़ा हैं | आखिर ये किसका पी.आर करते हैं ये मेरे सोच से परे कि चीज हैं |
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