Saturday, 9 January 2016

दशानन की उपेक्षा क्यों ?

हमारे देश में रावण को अधर्म और असत्य का दूसरा रूप मानते हैं. समाज में गलत करने वालो को रावण की संज्ञा दी जाती हैं लेकिन क्या वास्तव में वो इतना बुरा था, शायद नहीं क्योकी रावण एक परम ज्ञानी, महान शिवभक्त, अच्छा शासक और वीर योद्धा था जिसने पूरी पृथ्वी को जीतने की कोशिश की. समाज उसे अहंकारी होने का आरोप लगाती हैं लेकिन मेरे नजर में उनकी वो हठ सिर्फ अपनी और अपने परिवार की मुक्ति के लिए किया था. रावण ने सीता को लंका में लम्बे समय तक रखा लेकिन कभी उनके साथ अनैतिक काम करने की कोशिश नही की. ये इस बात का प्रमाण हैं कि रावण एक दूरदर्शी शासक था जिसने अपने पूरे परिवार को मुक्ति दिलाने के लिए पूरी योजना बनाई.वही हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जिन्हें सत्य और धर्म की मूर्ति मानते हैं. भले ही वो एक अच्छे पुत्र, शासक, और राजा रहे हो लेकिन वो एक अच्छे पिता और पति नहीं थे क्योंकी उन्होंने सीता की अग्नि परीक्षा लेकर अपनी पुरुषवादी मानसिकता को साबित किया था भले ही तुलसीदास ने राम को सही सिद्ध करने के लिए लाख तर्क दिये हों, क्योकि रावण को मारने के बाद ली गयी अग्निपरीक्षा के लिए किसी धोबी ने बाध्य नहीं किया था वो उनका खुद का फैसला था जो कही ना कही उनकी पुरुषवादी मानसिकता को दर्शाता हैं..

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