Monday, 5 January 2015

देश के शहीदों की उपेक्षा क्यों ?

आज हम 21वी सदी में जी रही हैं. जहाँ मनुष्य चाँद पर पहुँच चुका हैं. अब तो जल्द ही मंगल पर बस्तियां बनाने की बात हो रही हैं. आज का युग पूर्ण रूप से वैज्ञानिक व् संचार का युग हैं. लोग आज ज्यादा समय टेलीविज़न, कंप्यूटर, लेपटॉप, इन्टरनेट व मूवीज में बीताता हैं. लोग अपने संस्कृति इतिहास नायक सभी को भूलते जा रहे हैं. आज जो हमें ये आसान और खुली जिन्दगी मिली हुई हैं वो न जाने कितने लाखो ज़िन्दगी खोने के बाद मिली हैं. जो वास्तव में हमारे रियल हीरो हैं परन्तु ये हमारे देश का दुर्भाग्य ही हैं की आज हम पूरे तरह से पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण कर रहे हैं. आज किसी युवा से पूछो कि उसका हीरो कौन हैं? तो जवाब सलमान, शाहरूख़, अक्षय के रूप में सामने आते हैं.लेकिन क्या वास्तव में ये हीरो हैं. पर्दे के पीछे 20 लोगो को अकेले मारने वाले हीरो रियल लाइफ में अपने शरीर की रक्षा भी नहीं कर पाते हैं. अपने लुक से से हमारी युवा पीढ़ी को गुमराह कर रहे हैं. वास्तव में उनमे अपने देश के प्रति कोई लगाव नहीं होता हैं. वे तो मात्र अपन लिए जीते हैं. वही हमारे इतिहास में ऐसे कई हीरो का जन्म हुआ हैं जिनका पूरा जीवन अनुसरण करने लायक हैं जिनमे पहला नाम चन्द्रगुप्त मौर्य का आता हैं जिन्होंने अपने जीवन की शुरुवात अभावों से की परन्तु अपने साहस और शौर्य से पुरे देश का एकीकरण किया. इनका जीवन युवाओ के लिए आदर्श होना चाहिये. ऐसे ही नायको में वीर शिवाजी, अशोक महान, विवेकानंद, महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, राजेंद्र चोल, समुन्द्रगुप्त का नाम अमर हैं. ये हमारे संस्कृति और देश के धरोहर हैं. लेकिन हमारी वर्तमान पीढ़ी इन शूरवीरो को भूलती जा रही हैं. इनके अलावा हमारे आजादी के हीरो चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी, अशफाक-उल्ला-खां, रासबिहारी बोस, खुदीराम बोस, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, राजगुरु को भी हम भूलते जा रहे हैं जिन्होंने अपना जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया.इनके ही संघर्ष का ही परिणाम हैं की आज हम एक आजाद देश में जी रहे हैं कुछ भी लिख रहे, अपना विरोध दर्ज करवा सकते हैं. हमारे सरकार की उदासीनता और गलत नीतियों का परिणाम हैं की इनकी जन्मतिथि और पुण्यतिथि एक दिवस के रूप में रह गयी हैं. इनके विचार धूमिल हो चुके हैं और शायद इसी का परिणाम है की आज युवाओ से नैतिकता का लोप होता जा रहा हैं. युवा अपने माता पिता की इज्जत नहीं करते हैं. बसों में युवा सीट पर बैठे रहते हैं और बुजुर्ग खड़े रहते हैं. बड़ो का अपनाम करना वो अपना फैशन समझते हैं. समूचा विश्व जब आज हमारी संस्कृति की इज्जत करता हैं वे हमारी संस्कृति को लेकर आकर्षित हैं वे आज भारतीय परम्पराओ के अनुसार विवाह करना पसंद करते हैं. साड़ियों को लेकर उनमे अजीब सा क्रेज हैं क्योकी वो सोचती हैं की कैसे 7 मीटर लम्बी साड़ी से पुरे शरीर को ढकती हैं.उन्होंने वेद, उपनिषदों का अध्ययन कर भारतीय संस्कृति का मर्म समझा और आकर्षित होने लगे.
मैं देश के युवाओ से अपील करना चाहूँगा की अपने देश के असली हीरो को जाने उन्हें अपना मार्गदर्शक बनाये.ऐया नहीं हैं की विज्ञान, खेल, दर्शन जैसे क्षेत्र में नायको की कमी हैं. सी.वी.रमण, ए.पी.जी.अब्दुल कलाम, होमी जहागीर भाभा, ध्यानचंद, सचिन तेंदुलकर, महात्मा गाँधी जैसे विभूतिया से हमारे इतिहास भरा पड़ा हैं. हमने ही पहली मानव सभ्यता की नीव रखी. विश्वगुरु का दर्जा हमे प्राप्त हैं तो वही सोने की चिड़िया कहलाने का गौरव हमें ही मिला था.जिसे बनाने वाले ही हमारे देश के नायक हैं न की फिल्मी हीरो जो एक फ़ोन पर करोडो रूपये देश के और समाज के दुश्मनों को दे डालते हैं....

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